अमन का पैगाम

उनका जो फ़र्ज़ है वो अहले सियासत जानें, मेरा पैग़ाम मुहब्बत है जहां तक पहुंचे

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S.M.MAsum


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अंतरजाल पे कैसे खेली लोगों ने जम के होली|

Posted On: 19 Mar, 2014  
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Junction Forum में

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दंगो का कारण बताओ और सत्ता में आओ |

Posted On: 6 Mar, 2014  
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Politics में

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सत्यमेव जयते

Posted On: 1 Jun, 2013  
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बलात्कार और हमारा परिवार- Jagran Junction Forum

Posted On: 26 Apr, 2013  
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फतवा और जिहाद

Posted On: 20 Apr, 2013  
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वासना हिंसा की ओर प्रेरित करती है, प्रेम बलिदान की ओर

Posted On: 4 Apr, 2013  
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जौनपुर को देख के ऐसा लगता है

Posted On: 17 Mar, 2013  
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सामाजिक सरोकारों से जुड़ कर कैसे काम करें?

Posted On: 25 Jul, 2012  
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भारत वर्ष को कट्टरवाद से बचाओ

Posted On: 25 Jun, 2012  
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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat

के द्वारा: Dr. Anwer Jamal Khan Dr. Anwer Jamal Khan

के द्वारा: smma59 smma59

के द्वारा: vedquran vedquran

के द्वारा: vedquran vedquran

के द्वारा: smma59 smma59

इमाम हुसैन ने एक सुंदर वास्तविकता का चित्रण किया और वह यह है कि जब भी अत्याचार व अपराध व बुराईयां मानव के समाजिक जीवन पर व्याप्त हो जाएं और अच्छाइयां और भलाइयां उपेक्षित होने लगें तो उठ खड़े होकर संघर्ष करना चाहिए। समाज में जीवन के नये प्राण फूंकना चाहिए और सार्वजनिक हितों और आध्यात्मिक मूल्यों के लिए व्यक्तिगत हितों को त्याग देना चाहिए भले ही इस मार्ग में मनुष्य का प्राण, धन व संपत्ति ख़तरे में पड़ जाए KAASH HAM SAB ..... इमाम हुसैन ने एक सुंदर वास्तविकता का चित्रण किया और वह यह है कि जब भी अत्याचार व अपराध व बुराईयां मानव के समाजिक जीवन पर व्याप्त हो जाएं और अच्छाइयां और भलाइयां उपेक्षित होने लगें तो उठ खड़े होकर संघर्ष करना चाहिए। समाज में जीवन के नये प्राण फूंकना चाहिए और सार्वजनिक हितों और आध्यात्मिक मूल्यों के लिए व्यक्तिगत हितों को त्याग देना चाहिए भले ही इस मार्ग में मनुष्य का प्राण, धन व संपत्ति ख़तरे में पड़ जाए

के द्वारा: abodhbaalak abodhbaalak

के द्वारा: smma59 smma59

मासूम भाई,आपने जो भी कुछ इस्लाम के बारे में अपने लेख में बताया वो सब कुछ सामाजिकता को बढ़ावा देने वाला है,यही सब कुछ अच्छी बातें हिन्दू धर्म में भी हैं,दरअसल धर्म की सही व्याख्या करने का जिन पर दायित्व है उनमें से अधिकतर अपने फायदे में उसकी गलत व्याख्या करते हैं,धर्म का कम समाज को जोड़ना और इंसान की भलाई है और जो व्याख्या इस कसौटी पर खरी नहीं उतरती वो सही हो ही नहीं सकती,इसलिए जरूरत है की आम लोग धार्मिक ग्रंथों को खुद पढ़ें और समझें और सही सोच रखने वाले लोग इसकी व्याख्या को आम आदमी तक पहुंचाएं,काम मुश्किल है लेकिन तभी धर्म और आम आदमी इन वेस्टेड इंटेरेस्ट के चंगुल से मुक्त हो पायेगा,

के द्वारा:

आज के पश्चिमी मीडिया, ने १०% मुसलमान जो की राजशाही के ग़ुलाम हैं, उनकी बातों को, तरीके को,फतवों को इस्लाम बना रेखा है . यह बहुत से लोग नहीं जानते के हकीकत मैं कुरान मैं क्या है… और यकीनन जो कुरान है वही इस्लाम है…..आज इस बात की ज़रुरत है की इस्लाम को मुहम्मद (स.अव० और उनके घराने की सीरत, किरदार और कुरान की हिदायत से पहचनवाया जाए. सही कहा है आपने। आप कौन हैं मैं नहिं जानती पर मुझे अफ़सोस है कि यहाँ आने में क्यों मुझ्से देर हो गई? इस्लाम कि एक लाजवाब तस्वीर रखदी है आप्ने। इस्लाम उन बहत्तर शहीदों कि शहादत का नाम है जो करबला किसुखी जमीँ पर सच्चाई कि राह में शहीद हो गये। आपके अगली पोस्ट का इंतेज़ार रहेगा।

के द्वारा:

प्रिय भाई,मैंने कुरान नहीं पढ़ी लेकिन मैं जानती हूँ कि सभी धर्मों का मूल तत्त्व एक ही है वो है 'इंसानियत', सभी को पैदा करने वाला,पालनेवाला भी एक ही है चाहे उसे भगवन कह लो या खुदा,ये तो उस धर्म के 'vested इंटेरेस्ट' होते हैं जो कि उस मजहब के लोगो की कमियों का फायदा अपनी position को बेहतर करने और बनाये रखने के लिए करते हैं और वोही उस धर्म की बदनामी का कारण बनते हैं,वे सभी धर्मों मैं हैं और जो धर्म जितना पुराना होता है उसमे ऐसे लोग ज्यादा होते हैं,जब सारे हिन्दू गीता और रामायण खुद पढेंगे और सही तरह से समझेंगे,सारे मुस्लमान कुरान खुद पढेंगे और समझेंगे,और सारे धर्म के लोग ऐसा करेंगे तो ही इन 'vested interest ' के चंगुल से धर्म भी आज़ाद होगा और इंसानियत भी,अभी तो धर्म और इंसानियत को इन 'vested interest ' ने गुलाम बना रखा है,हाँ जो सही सोच के लोग हैं उनको इसके लिए जागरूकता फैलाने का काम करना होगा जो कि आसन तो नहीं ही होगा लेकिन करना पड़ेगा,ताकि आने वाली पीढियां बेहतर जिन्दगी जी सकें

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